Archive for the ‘Thoughts’ Category

Dust

Posted: February 25, 2014 in Fiction of My Mind, Thoughts

Last night my mom called me in the middle of night, I rushed to her but I was of no help, she was shocked, maybe because of some weird dream. Once she realized it was only a dream she had a little water and then calmly settled in her sleep, dad was there just watching her sadly. In past three years he’s aged like a decade. He used to be a strong man full of life and courage, but sadly not anymore. He retired last year from his job in that government office. He used to go out a lot and mingle with people his age, but somehow he’s stopped doing that, like he doesn’t derive any pleasure out of it. He never says anything and I can’t read minds but I know somewhere deep down inside he’s sad, very sad, but he has to pull up that strong face. What else can he do? He must hold his nerves, at least for my mom’s sake, she’ll be shattered if she realize how sad he is, so he still smiles but cracks no jokes, he still hold the newspaper but hardly reads anything, maybe thinking all the what ifs in his head?

Ahh let me introduce myself, I’m… but how does it matter? My name won’t change anything, will it? But I’ve to tell about myself, it is not fair to tell you about my parents’ sadness without introducing the reason behind it. I’m one of the thousands born every day, but to my parents I’m special, though I beg to differ, I’m just mediocre. One of the many IT professionals out there. But for my family I’m special… the smart one, one who reads all the time, or this is just what they think. It’s not that I’m boring or dull I’ve many friends but I’ve lost them all slowly. Things change, time change and so does the priorities of people. I remember clearly the day of my engagement… makes me smile, I had struggled so much to fit in that size 38. Sigh!!  Vanity…

I don’t know where she is, but I hope she is happy, somewhere with someone. I haven’t tried to track her; I fear how I’m going to take it. Even if she’s happy or sad, in both cases it’ll make me more depressed, after all we are not together and for me it is not easy to let go… I had friends, but I think they too are busy with their own lives; no one has ever come to my doorsteps in the last three years. Secretly I had this hope that they will come and check how we are doing after that accident. But no one ever visited us, some simply don’t care and some find it awkward to make any communication regarding me so they simply moved on. Something deep inside me tells me they have forgotten me, the memories have faded or maybe just left behind because it is unsettling and uncomfortable. Sometimes we ignore the sight of plight and grief because it makes us sad. And of course when you have so many troubles of your own why would you worry about someone left behind. Right?

It’s already 10 in morning, my brother is usually up by this time but today he’s not here yet. Mom has got no breakfast ready. Strange! But Maybe she’s still pondering over her dream from last night and Dad? As I said he’s on the ground floor with his thick glasses and newspaper. And see here he is, my brother… He used to be my best friend but like everything else we too have stopped talking, mainly it is me, because I can’t tell him that I’m still not letting go and I’m still sad over what happened that night and I know it was my fault because of what I’ve caused you this grief…

What is he doing there? Dad is also there now, mum is crying silently, and they are just huddled up. What is that they are looking at in the newspaper??? Oh like last year, someone has written about me. I think it’s… again what it has to do with the name? But I suspect it’s her

In memory of…
The Best Son, The Best brother and the Best friend
(19xx-forever)

For three years life has been the same, exactly same for everyone, nothing changed apart from those three people I call family.

Tomorrow I’ll complete three years in this very realm between the living and something, watching everything helplessly… Tomorrow I’ll be dead, for three years,
for three years nothing but settling Dust!!

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    कुछ जो खो गया
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कैसे सोचते थे ना तुम,
बदल दोगे सब कुछ,
पल में एक, नहीं पल में तो नहीं
पर कुछ पलों में शायद

और अब कुछ खो गया है
जो पता भी नहीं क्या है, पर है.
है नहीं था, अब तो खो गया ना
और वापस भी नहीं आएगा
टीवी का धारावाहिक थोड़े ही है
की रात को छुटे तो दिने में

कभी कभी या अक्सर कहते थे
शायद कभी किसी दिन ऐसा होगा
या फिर ऐसा ना हो तो वैसा होगा
अब सोच रहे हो कैसे होगा?

मोमबत्ती के मोम की तरह
पिघलकर या जलकर
सिगरेट के धुंए की तरह उड़कर
या बस यूँ ही, पर खो गया
पर शायद… अभी भी लगता है
फिर वापस मिल जायेगा

 

कल वो अकेला था, शायद बहुत अकेला
घर से दूर, अनजान शहर में, अकेला
अब वो अस्पताल में है. और मैं ?
मैं उसके बगल में बैठा हूँ… अकेला.

पता नहीं वो अकेला है या मैं
या हम दोनों अलग अलग अकेले हैं?
बस एक बात पता है,
अकेला नहीं छोड़ सकता उसे.

आज कोई नहीं आया
शायद कल आये, उसके घर से
या परसों, या ना आये
मैं अकेला रहूँ या नहीं
उसे मैं दिखूं या नहीं, पर
मैं उसे अकेला नहीं छोड़ सकता

तो बस मैं रात भर यहीं बैठा रहूँगा
बिस्तर के पास, ठन्डे फर्श पर,
दीवार से कमर सटाए,
इस पन्नों और कलम के साथ

देखो ना, अकेला कहाँ है वो,
मैं हूँ, मेरी कलम है, ये पन्ने हैं,
ये रात है, और रात है तो
कल दिन होगा, कल तो वो उठेगा

सुबह के बाद मैं कहीं जाऊंगा नहीं,
कहीं उसे ये ना लगे की वो अकेला है
सब खुश हैं, वो नहीं, मैं नहीं,
और मैं जानता हूँ…

अकेला होना बहुत बुरा है

 

सवाल

Posted: September 9, 2013 in So called Poetry, Thoughts

आज बारिश हुई थी.
‘आज भगवान खुश हैं’ ऐसा माँ बोलती थी,
क्यूंकि मैं सवाल करता था, बहुत सारे सवाल.

सीधे, उलझे, पर सवाल, हर बात पर,
और लगता था माँ को सब मालूम है
और सब मालूम होता भी था
क्यूंकि वो माँ हैं.
नहीं मालूम होता तो भी वो बताती थी
कुछ ऐसा की मैं सीखूं, कुछ अच्छा

आज फिर सवाल हैं,
जवाब भी हैं, पर वैसे नहीं जैसे माँ के पास थे
क्यूंकि अब सवाल भी तो माँ से नहीं
खुद से हैं.
और ज्यादा नहीं, थोड़े ही हैं, दर्जन भर
या उससे भी कम, पर जवाब बहुत हैं

हर एक जवाब सही है, अपनी जगह
पर शायद अब मैं सही जगह नहीं हूँ
किसी ने कहा था, ना सवाल गलत होते हैं
ना जवाब, बस गलत होते हैं तो हम.
अब सवाल होगा क्या मैं गलत हूँ?

आज हर जवाब सही है,
बस शायद मैं नहीं…

 

 

ये मेरी किताब है, मेरी कहानी भी
शायद…
यहाँ वो सब है जो कहीं नहीं.
कहीं नहीं ?
नहीं ऐसा नहीं है की
कहीं नहीं तो सब अच्छा है
कैसे हो ? मैं खुद नहीं.

ये चीज़ें यहाँ हैं, और कहीं नहीं
क्यूंकि ये किताब मेरी है,
और इसमें कुछ कहानी मेरी भी.
ये चीज़ें यहाँ हैं क्यूंकि, क्यूंकि
इन्हें कहीं और जगह नहीं मिली
और मुझे भी नहीं. इन कागजों
के आलावा.

नहीं, ये हेडफ़ोन भी तो लगा है
पर इनमे मेरी जगह नहीं है
किसी के गीत, किसी के बोल,
मैं बस सुन रहा हूँ… शायद
या फिर ये भी काफी पहले से बंद है ?
शायद लैपटॉप के साथ ही बंद हुआ

जो भी है, ये कागज़ मेरे हैं,
कलम भी, किताब भी, नहीं कलम नहीं
आफिस की है, बैग में छुट गयी थी
पर किताब मेरी है
और एक दिन ये पूरी होगी
नहीं इसलिए नहीं की ये अच्छी है

ये पूरी होगी क्यूंकि
इस किताब में कहीं मैं छुपा हूँ,
शायद.
कहीं कुछ भरे कुछ खाली पन्नो के बीच
कुछ अच्छे और बहुत से बुरे पलों के साथ
और जब तक मैं रहूँगा
मेरी किताब भी
क्यूंकि ये मेरी किताब है
मेरी कहानी भी…
शायद.

 

आज़ाद हम.

Posted: August 14, 2013 in So called Poetry, Thoughts

देश आज़ाद है मेरा, और मैं भी
कल तुम भी थे और मैं भी
और फिर दूसरे कल भी रहेंगे
ऐसे ही, आज़ाद

कमरों में बंद, टेलीविजन से चिपके,
बम, जेहाद, आतंकवाद से डरे सहमे,
माओं के कहने से घरों में रुके लाखों
हम, आज़ाद

फेसबुक पर तिरंगे झंडे शेयर करते
और नेताओं पर फब्तियां कसते
और पतंगों की डोर से भी ज्यादा उलझे
हम, आज़ाद

और ऐसा क्यों न हो, हम ऐसे ही हैं –
पढ़ते, याद करते गाँधी जी का जंतर
नहीं याद आते कभी, भगत, सुभाष
और वो आज़ाद

मानता हूँ मैं, एक दिन नशा उतरेगा
इस कथित आज़ादी का, इस आडम्बर
के सैलाब का, वोट की राजनीति का,
होंगे हम, आज़ाद

तब ना डर होगा जंग का, ना रोष होगा
लाल किले के एक और व्यर्थ भाषण का
होगी तो बस एक आवाज़, एक उद्घोष
हम हैं, आज़ाद ।

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कभी कभी मैं खुली आँखों से सपने देखता हूँ, हर तरह के, और ऐसा ही एक सपना अपने मुल्क के लिए है. एक ऐसा देश जो सच में आजाद, उन्नत, विकसित और खुशहाल हो. कई बार लंच के समय अनेकों बार बहस की है, क्यूंकि वर्तमान चाहे जो भी हो पर मैंने अभी अपने देश से उम्मीद नहीं खोयी है. जादू, चमत्कार या कोई प्रक्टिकैलिटी एक दिन हम सबसे ऊपर होंगे, ये मेरा सपना भी है, विश्वास भी. ज्यादा नहीं लिखूंगा, सपने बस तभी कारगर हैं, जब सिद्ध हों।
और मेरे सपने सच होते हैं… अक्सर।

जय हिन्द.
जय भारत.


लिखने में हुई गलतियों के लिए माफ़ी (दोष इस सॉफ्टवेयर का है, मेरा नहीं)

एक नज़र का चश्मा है मेरी मेज़ पर
और एक पानी की बोतल, शायद स्टील की
और कुछ पन्ने, उस एक अधलिखी किताब के
जो शायद कभी पूरी ना होगी.

नाम मिटने लगा है अब इस बोतल पर से
बुरा लगा था जब पहले पहल मिटते देखा था
ठीक वैसे ही जैसे बचपन में लगा करता था
जब वो मोम वाले रंग खत्म होते थे.

कुर्सी पर कमर लगाये, मेज़ पर पैर फैलाए बैठा हूँ
पर इस मेज़ को शिकायत नहीं, ना इन पन्नों को
बस मुझे है. शिकायत का शायद पता नहीं, पर हाँ
रोष है, अवसाद है, और सर दर्द भी.

कभी कहीं भाग जाने को दिल किया है आपका ?
पर भागे नहीं, क्यूंकि एक मेज़ थी, और उसपर
वो एक तस्वीर, उसे ही देखकर पैर ठिठके थे ना ?
मेरी किताब भी ठिठकी है, और मैं भी.

आये दिन ये नज़र का चश्मा भी मजाक करता है
काम नहीं चलता ना  इसके बिना, पता है इसे
आज मेज़ भी है, चश्मा भी, और शायद कुछ नहीं भी है
तभी शायद इन पन्नों पर लिखने का मन कर आया है.

पर ये पन्ने भी खोते से जा रहे हैं अब, गम नहीं
और क्यूँ हो, मेरी कहानी थोड़े ही है इनमे
और हो भी तो क्या मैं यहाँ तुमसे सच कहूँगा?
कहते हुए शायद रो ना दूंगा?

ये थी मेज़ और अधलिखी किताब की कहानी
मेरी कहानी ?
किसी दिन और सही…

Will Not Stop

Posted: February 20, 2013 in So called Poetry, Thoughts

A small walk
that goes hand in hand
a sound sleep that
rests on shoulder
a sweetness that we share
your frown that I care
our voices so still
that heartbeats come to living
no matter how and where and why I am,
will not stop loving…

Happiness is cherished with you,
and you know about my tears too,
days sometimes are just black
Hopefully I can hold myself back,
I just count my days dear,
hours with you will be many more
o please..!!
hold me, hug me so near to you
so that every breath,
every thought
starts thanking you,
for I promise that a bigger promise
is waiting,
will not stop loving…

A whisper I hear,
a call so dear,
an hour much awaited
when another day adds to us again,
may the smile remains the same,
and happiness lifelong blooms,
and may everything you touch
always experiences unfading spring
will not ever…
will not ever stop loving!!

Promise

Posted: January 6, 2013 in My Life, So called Poetry, Thoughts

These distances may separate your hands from minePromise
these long roads may divide your heart and mine
but I still have this love for you so divine!
Every time you’re lonely or every time you’re mad
every time you’re angry or every time you’re sad
I wish I could snatch away every problem you had or have
Right now, there’s not much I can do
Except listen and try and brighten your day by my words
so every day I do the best I can to cheer you up
At the same time I know you’ll do the same for me
you fill my world with happiness and bliss
But sometimes I’m afraid that the miles and roads
that separate us might become too much to bear
And you’ll do what u feel is better for you and move on
But I never want to lose you, NEVER
I don’t want to do nothing but please n love you; till the day I die
I will always be by your side
When you laugh and when you cry
From this day forward I make this Promise
And it’s because I know I will keep it
No matter how hard time may be
Or how blue our days may seem
No matter what we go through
No matter what we do
No matter where we are
I promise………
No matter what I will ALWAYS love
And that is my promise ”
A Promise I make just to you..!!

Pain

Posted: December 19, 2012 in So called Poetry, Thoughts

The dark dirty floor of the lonely shedsad-umit-ozkanli
she still remember, no matter what.
The agony as every piece of clothing she had
was getting torn off in fast, tortorous motions. 
And that sweaty, rough hand covering her
mouth as she tried to scream for help. 
The help that never came.
And she screamed despite
the sweaty hand over her mouth 
Her hopes and dreams were over, 
shattered, torn and burned.

The pain was something never felt before, 
it wasn’t the cuts, bruises nor the slaps. 
This pain would never go away or heal.
Then as if time stood still 
She lay wondering what they would think.
She tried so hard to get herself to safety
but she was weak  for every move she made 
felt like the world was crashing, no escapade.

At that moment she prayed that she would die. 
For to live a life with this pain and wound
that would never heal was unbearable. 
As she stopped screaming she thought she had died
The pain was still there but a numbness had arise. 
As she looked up she realized the torture was over 
But she lay there trying to figure out why this all 
happened, and why it had happened to her. 

To this day there isn’t a moment when she
don’t think about that day in the lonely shed. 
The pain and suffering still lurks in her head. 
It isn’t forgotten and never will be, 
for that is how It’ll always be.

But she’s strong willed and determined for she
have this life, and she know she have to live
stronger every day, leaving things behind.
Looking in their eyes, making a statement
no matter what, whatever you may try
I’ll live a life, challenging, bigger and bright.

But no one should feel that way.
No one should cause that pain
For that pain lasts a life time.